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Saturday, 30 April 2016

Post003 हे गुरु

हे गुरु,

तुमसे बढ़कर कौन होगा
ब्रह्म के इस भूतल में,

अनंत सागर, हिम् के पर्वत,
अटल जग, चराचर में,



जलज सरोवर, ऊचे तरुवर,
और इस सारे आडम्बर में,

तुम हो युग के सूत्रधार,
विश्व मंच के निर्देशक,

निश्चित करते भविष्य देश का,
सृष्टिकर्ता के प्रतिवेदक,

तुम्ही ने बताई मुझे राह,
तुम्ही ने दिखाया विजय का पथ,

तुम हो अप्रतिम कृति ब्रह्म की,
हे इस जग के मार्गदर्शक,

एकलव्य, ध्रुव और सिकंदर
कोई न होता विश्व पटल पर,

तुम न होते में भी न होता,
फंसा होता अज्ञान दलदल में

हे गुरु , तुम से बढ़कर कोन होगा
ब्रह्म के इस भूतल में

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