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Friday, 10 June 2016
Post006 माँ का खाना
चूल्हे में खुद को खपाते हुए देखा है
दूसरो को खाना खिलाते हुए देखा है
पर क्या कभी तुमने
माँ को खाना खाते हुए देखा है
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Saturday, 30 April 2016
Post003 हे गुरु
हे गुरु,
तुमसे बढ़कर कौन होगा
ब्रह्म के इस भूतल में,
अनंत सागर, हिम् के पर्वत,
अटल जग, चराचर में,
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Thursday, 28 April 2016
Post001 माता और पिता
माता और पिता अपने पूरे जीवन में हमें क्या क्या देते है इसका अंदाज़ा लगा पाना भी संभव नही। उनके योगदान को शब्दों में बाँध पाना असंभव है। मेरी एक बहुत छोटी सी कोशिश आपके सामने रख रहा हूँ......
माँ धरती तो पिता वृक्ष है,
माँ नदिया तो पिता किनारा
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