माता और पिता अपने पूरे जीवन में हमें क्या क्या देते है इसका अंदाज़ा लगा पाना भी संभव नही। उनके योगदान को शब्दों में बाँध पाना असंभव है। मेरी एक बहुत छोटी सी कोशिश आपके सामने रख रहा हूँ......
माँ धरती तो पिता वृक्ष है,
माँ नदिया तो पिता किनारा
माँ नदिया तो पिता किनारा
माँ चूल्हा तो पिता गाँव है,
पिता है नीति तो माँ शिवाला
पिता है नीति तो माँ शिवाला
माँ का अंचल पिता का भुजबल,
पिता है अम्बर तो माँ है भूतल
पिता है अम्बर तो माँ है भूतल
क्यों पूजू में पत्थर को फिर,
जिसके प्रकार अनेक
जिसके प्रकार अनेक
ऐसे फ़रिश्ते कह सकता हूँ,
जग में होंगे केवल एक
जग में होंगे केवल एक
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