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Friday, 10 June 2016

Post006 माँ का खाना

चूल्हे में खुद को खपाते हुए देखा है
दूसरो को खाना खिलाते हुए देखा है
पर क्या कभी तुमने
माँ को खाना खाते हुए देखा है



क्या कभी ताज़ी रोटी सबको और बासी खुदके लिए बचाते हुए देखा है
सब्जी न हो कोई दुःख नहीं 
क्या कभी दाल में खुदके लिए और पानी मिलाते हुए देखा है
कभी माँ को खाना खाते हुए देखा है

अन्नपूर्णा क्या है तुम कैसे जानोगे
जब तक खुद देखोगे नहीं तुम मेरी बात कैसे मानोगे
कभी खुद की थाली की कटोरिया और माँ की थाली में रोटियों को गिन कर देखा है
सबको खिलाते हुए तो बहुत देखा होगा पर
क्या कभी माँ को खाना खाते हुए देखा है

तुम्हे जब खाना खाना हो तो भूख को जगाना होता है
कभी सोचा आखिर में खाने का माँ के पास रोज क्यों एक नया बहना होता है
कभी सब्जी को दाल में मिलाते हुए देखा है
कभी माँ को खाना खाते हुए देखा है

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